स्वामी अप्रतिमानंदा जी के अप्रतिम साहित्य के अप्रतिम प्रभाव की एक अप्रतिम झलक

हिंदी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वामी अप्रतिमानंदा जी की लोकप्रिय लघु कहानियाँ पुणे से प्रकाशित हिंदी भाषा के ख्याति प्राप्त दैनिक समाचारपत्र 'दैनिक दिवस-रात्री' के सुप्रसिद्ध स्तंभ 'दिव्य चक्षु' में एवं पाक्षिक साहित्यिक पत्रिका 'सीधी बात' में  एक बड़े समय तक प्रकाशित होती रहीं हैं। साथ ही इन पत्र-पत्रिकाओं में उनकी अप्रतिम कवितायेँ भी साहित्य-प्रेमियों को भाव विभोर करती रही हैं। 
 
स्वामी अप्रतिमानंदा जी के अप्रतिम साहित्य के अप्रतिम प्रभाव की एक अप्रतिम झलक:
 
[१] शाहरुख़ ख़ान का प्रसिद्ध हिंदी चित्रपट 'स्वदेश' स्वामी अप्रतिमानंदा जी की 'दैनिक दिवस-रात्री' में प्रकाशित एक लोकप्रिय लघु कहानी से प्रेरित बताया जाता है। इस कहानी ने बुद्धिजीवियों की अप्रवासी भारतीयों के प्रति ब्रेन ड्रेन [ब्रेन ड्रेन brain drain - बुद्धि पलायन] की भावना को ब्रेन गेन brain gain - बुद्धि आगमन/लाभ] के रूप में बदल दिया। सत्य यह है कि 'ब्रेन गेन' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग  स्वामी अप्रतिमानंदा जी ने ही किया था ! 'ब्रेन गेन' [brain gain] शब्द स्वामी अप्रतिमानंदा जी के मष्तिष्क की ही उपज और  देन है। 
[२] मधुर भंडारकर के हिंदी चित्रपट 'कॉर्पोरेट' में स्वामी अप्रतिमानंदा जी की एक लोकप्रिय लघु कहानी 'टेंडर' को एक बहुचर्चित दृश्य के रूप में फिल्माया गया है। अंतर मात्र इतना ही है कि चित्रपट 'कॉर्पोरेट' में मंत्री महोदय अपने सचिव को रिक्त टेंडर [ निविदा ] - आवेदन पत्र में पाँच पैसे नहीं, वरन पाँच करोड़ रुपयों की संख्या भरने का आदेश देते हैं!
[३] उत्तर प्रदेश राज्य की बहुजन समाजवादी पार्टी की मायावती सरकार का सुप्रसिद्ध नारा 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' स्वामी अप्रतिमानंदा जी की एक लोकप्रिय कविता 'भगवान में क्यों दोष तुम ढूंढते हो?' से अनाधिकृत रूप से लिया गया है।
[४] आम आदमी पार्टी ने सुप्रसिद्ध नारा 'हाँ, मैं हूँ आम आदमी' / 'हाँ, मैं आम आदमी हूँ' स्वामी अप्रतिमानंदा जी की इंटरनेट पर उपस्थित  एक लोकप्रिय कविता 'हाँ, मैं आम हूँ' की पंक्ति 'हाँ, मैं आम व्यक्ति हूँ' को अनाधिकृत रूप से तोड़-मरोड़ कर अनाधिकृत रूप से बनाया है।
[५] स्वामी अप्रतिमानंदा जी की 'दैनिक दिवस-रात्री' में प्रकाशित एक लोकप्रिय लघु कहानी 'अतिक्रमण विरोधी मुहिम' से प्रेरित हो कर तत्कालीन महाराष्ट्र राज्य सरकार ने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के लिए २०-२५,००० रुपयों की कीमत वाले स्थायी घरों की योजना लागू की थी। साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों ने भी प्रेरित हो कर भारतवर्ष के विभिन्न भागों में अनाधिकृत झुग्गी-झोपड़ियों को अधिकृत करने की माँग अपने अपने घोषणा पत्रों में सम्मिलित की!
[६] यह तो अब सर्वविदित है कि वर्तमान नरेंद्र मोदी की केंद्रीय सरकार ने स्वामी अप्रतिमानंदा जी के इक्कीसवीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ स्वर्णिम राजनैतिक ग्रंथ 'The Vasudhiotic World Government And The Great Indian Dream Of The Paramatantrataa' में सुझाये गए कई जन कल्याण के सुझाओं को पूर्ण/आंशिकरूपेण किर्यान्वित कर दिया है या किर्यान्वित करने वाली है।

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